नहीं रहा अडोल्फ हिटलर का पालतू घड़ियाल Saturn, इस कारण किया जा रहा उसे याद

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अमेरिका में जन्मे 84 साल के सैटर्न नाम के घड़ियाल की मौत हो गई है, जिसने अपनी जिंदगी रूस के मॉस्को जू में बिताई है। इस घरियाल के मरने की खबर इस तरह चर्चा का विषय इसलिए है क्योंकि यह दूसरे विश्व युद्ध की बमबारी में बच निकला था। बताया जाता है कि यह घरियाल जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर का पालतू घड़ियाल हुआ करता था, लेकिन इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, इन बातों के अलावा भी कई ऐसी बातें हैं जिसके कारण यह घड़ियाल अब तक मशहूर रहा था।
यह घड़ियाल 1943 में बर्लिन के जू पर हुए बम धमाके में बचने वाले जानवरों में एक था, इसके अलावा यह एक सामान्य घरियाल से कहीं ज्यादा लंबा जीवन जीने वाला घड़ियाल भी था।
हिटलर के करीबी माना जाता था ये घड़ियाल
दरअसल बर्लिन की जून में यह घड़ियाल आकर्षण का केंद्र बना हुआ था, मॉस्को जून के वेटरिनेरियन दमित्री वसिल्येव का घड़ियाल के बारे में कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि हिटलर को यह काफी पसंद था और समय के साथ इसे लेकर अफवाह फैलने लगी कि वे हिटलर के कलेक्शन में शामिल था। लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है। सैटर्न ने अपनी जिंदगी के आखिरी साल मॉस्को जू में बिताया और इस दौरान मौत को कई बार धोखा भी दिया।
उन्होंने बताया कि 1980 में घड़ियाल के एकदम करीब कंक्रीट की एक स्लैब गिरी थी जिसमें वह बच निकला, इसके बाद जू में एक विजिटर ने उस पर पत्थर मारा जिसके बाद वह कई महीने तक घायल रहा और दो बार गुस्से में उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया। बावजूद इसके वह काफी टाइम तक जीवित रहा।
3 साल तक गायब था सैटर्न
सैटर्न का जन्म 1936 में मिसिसिपी के जंगलों में हुआ था, उसके बाद उसे बर्लिन भेज दिया गया। 1943 के नवंबर में वहां बम धमाका होने के बाद वे 3 साल तक गायब रहा। लेकिन बाद में ब्रिटिश सैनिकों को सैटर्न मिल गया। इन 3 सालों में वह कहां रहा, इसके लिए भी लोगों ने कई थेयरी बताई है। माना जाता है कि वे बेसमेंट, अंधेरे कोने और सीवेज में छिपा रहता था और वहीं कुछ का कहना है कि एक नाइजीरियन ने उसे पाल लिया था जिसके बाद वह ब्रिटिश सैनिकों को मिला था।
बताया जाता है कि 1990 में जब सोवियत यूनियन की हार हुई तो सैटर्न की आंखों में आंसू देखे गए थे, क्योंकि रूस की संसद पर हुए हमले से उसे बर्लिन धमाके की याद आती थी। बताया जाता है कि सैटर्न एक युग की तरह था वह जीत के बाद आया था और जंग की 75 वीं सालगिरह भी देख कर गया था।
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