4 बहनों के इकलौते भाई थे सुशांत सिंह राजपूत, मां ने हर मंदिर की चौखट पर मत्था टेककर मांगी थी मन्नत

बाॅलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने बेहद ही खामोशी से दुनिया को अलविदा कह दिया। मां का वो लाडला 'गुलशन'जिसे कभी उन्होंने अपने खून से सींचा था, आज दुनिया से मुंह मोड़कर जा चुके हैं। जी हां 'गुलशन' यही वो नाम था जिसे सुशांत को उनके परिवार वाले और पड़ोसी प्यार से पुकारा करते थे। देवी-देवता की चौखट पर मत्था टेककर मन्नतों से मांगे उस बेटे ने रविवार को अपने घर में आत्महत्या कर ली।



सुशांत के जाने के बाद उनके सभी परिवार वाले और प्रियजन गहरे सदमे में है। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि परिवार का होनहार बेटा, जिसने इतने बड़े शहर में अकेले अपने दम ऊंचा मुकाम हासिल किया, जो सभी परिवारवालों की परवाह किया करता था, सभी का आदर किया करता था, वो ऐसा कदम उठाएगा। हमेशा खुश रहने और जिंदगी को जीने की सलाह देने वाले सुशांत ने कैसे हार मानकर मौत को गले लगा लिया? ये कई सवाल सुशांत खड़े कर चले गए।



सोमवार को मुंबई में सुशांत का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे की चिता मुखाग्नि दे रहे पिता की आंखों में जो दर्द था वह बर्दाश्त नहीं किया जा रहा था। उनकी बहन रोते हुए कह रही थीं कि भाई वापस आ जाओ।' इसी के साथ सुशांत के बचपन के वो पल वो लम्हें भी एक-एक कर उनकी आंखों के सामने आ रहे होंगे। जो सुशांत अपने पिता-मां और बहनों के साथ बिताए थे।सुशांत अपने परिवार के बेहद लाडले थे। होते भी क्यों ना? आखिर एक मां की मन्नतों का, उनकी दुआओं का फल थे सुशांत। चार बहनों के इकलौते भाई थे सुशांत सिंह राजपूत। बता दें कि सुशांत की एक बहन का भी निधन हो चुका है।



चार बहनों के इकलौते भाई
सुशांत और उनके परिवार को जानने वाले पड़ोसी बताते हैं, कि चार बहनों के बाद सुशांत ने जन्म लिया था। उनकी मां स्वर्गिय ऊषा सिंह ने बेटे के लिए मंदिरों में मन्नतें मांगी थी, दुआंए की थी। तब जाकर सुशांत का जन्म हुआ था। सुशांत बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थे, शांत स्वभाव के थे, इसलिए हर दिल अजीज थे।
सुशांत की मां अक्सर 'पापा कहते हैं ऐसा काम करेगा... बेटा हमारा बड़ा नाम करेगा गाना गुनगुनाया करती थीं। सुशांत को भी यह गाना बेहद पसंद था, वह भी अक्सर इस गाने को गाया करते थे।



17 साल बाद गांव लौट की थी मां की आखिरी इच्छा पूरी
सुशांत ने मां का यह सपना पूरा भी किया था। सीरियल की दुनिया में नाम कमाने के बाद उन्होने बॉलीवुड में कदम रखा, और काई पो चे, एम.एस.धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी, और छिछोरे जैसी फिल्मों में दमदारी अदाकारी दिखाकर सफलता के शीर्ष पर भी पहुंच गए थे। लेकिन बेहद कम उम्र में ही सुशांत के हाथ से उनकी मां का हाथ छूट गया था। 2002 में ऊषा सिंह का ब्रेन हैमरेज की वजह से निधन हो गया था।



मां के चले जाने के बाद सुशांत बेहद अकेले पड़ गए थे। कुछ ही साल पहले सुशांत अपनी मां की मन्नत करने के लिए अपने ननिहाल भी गए थे। दरअसल सुशांत के जन्म के लिए उनकी नानी ने भी बौरण्य स्थित प्रसिद्ध देवी शक्ति पीठ में उनके मुंडन संस्कार की मन्नत मांगी थी। मां की इसी मन्नत को पूरा करने के लिए सुशांत ने ननिहाल जाकर देवी शक्ति पीठ में मुंडन करवाया था, गांववालों के साथ बेहद आदर से बातचीत की थी, और लड़कों के साथ क्रिकेट भी खेला था।



मां के नाम आखिरी संदेश
पटना के सुशांत राजपूत ने सोशल मीडिया पर शेयर अपनी आखिरी पोस्ट को मां को समर्पित किया जिनकी 2002 में उस समय मौत हो गई थी। 3 जून को इंस्टा परअ पनी मां की तस्वीर के शेयर कर सुशांत ने लिखा-आंसूओं से वाष्पित धुंधला अतीत। खत्म न होने वाले सपने मुस्कुराहट का एक हिस्सा उकेर रहे हैं। और एक क्षणभंगुर जीवन, दोनों के बीच सामंजस्य बनाता हुआ।
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