'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के डॉ. हाथी के बाद अब इस महत्वपूर्ण शख्स का निधन, शूटिंग रुकी


 
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मुंबई. टीवी की दुनिया के सबसे मशहूर धारावाहिकों में से एक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah)' के सबसे पुराने और अहम मेक-अप आर्टिस्ट आनंद परमार (Anand Parmar) का निधन हो गया है. इससे पहले सीरियल के अहम किरदार डॉ. हाथी यानी कवि कुमार आजाद ने दुनिया को अलविदा कहा था. उनके निधन से शो के मेकर्स को तगड़ा झटका लगा था. अचानक बीते कल यानी आठ फरवरी को 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की यूनिट को पता चला कि अब शो के साथ सबसे लंबे समय तक जुड़े रहे मेक-अप आर्टिस्‍ट आनंद अब इस दुनिया में नहीं रहे. यह खबर सुनकर कलाकारों समेत पूरी यूनिट को झटका लगा. इसके बाद शोक के महौल में उस दिन की शूटिंग रद कर दी गई.

जानकारी के अनुसार बीते करीबन 12 सालों से सबसे महशूर टीवी सीरियल के सभी किरदारों का मेकअप का काम 'आनंद दादा' ही संभालते थे. जी हां, उन्‍हें सेट पर ज्यादा लोग आनंद दादा ही कहते थे. लेकिन आठ फरवरी को वो दुनिया को अलविदा कह गए. उनका अंतिम संस्कार रविवार यानी नौ फरवरी को मुंबई के कांदिवली वेस्ट में किया गया. बताया जाता है कि उन्हें लंबे समय से कुछ बीमारी थी. लेकिन वो लगातार काम करते रहे.

जब इसकी जानकारी सीरियल के दूसरे लोगों को पता चली तो सभी भावुक हो गए. इसके बाद किसी का भी काम करने का मन नहीं हुआ. सभी ने आपसी सहमति से एक दिन की शूटिंग टाल देने की मन बना लिया.

tarak mehta
तारक मेहता का उल्टा चश्मा


आनंद परमार के निधन से 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मेकर्स के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. क्योंकि आनंद सर्व-सुलभ मेक-अप आर्टिस्ट थे. धारावाहिक के सभी कलाकार खुशी-खुशी उन्हीं से मेक-अप कराते थे. लेकिन चुनौती एक नए मेक-अप आर्टिस्ट को ढूंढ़ने की है. इसके बाद चुनौती यह भी है कि नया मेकअप मैन क्या सभी कलाकारों को उनके मन-माफिक मेकअप कर के दे देगा या फिर अब धारावाहिक मेकर्स को सभी के लिए अलग-अलग मेक-अप आर्टिस्ट बुलाने होंगे.


उल्लेखनीय है कि 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' को टीवी की दुनिया के सबसे सफल धारावाहिक बताया जाता है. 28 जुलाई 2008 से बहुत छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव के साथ यह शो लगातार चल रहा है. सबसे खास बात ये है कि आज भी शो टीवी की टाआरपी में हमेशा टॉप 10 में काबिज रहता है.

इस शो के किरदारा जेठालाल, दया, तारक मेहता, अंजिल, टीपेंद्र, चंपकलाल सभी-सभी इतने मशहूर हो चुके हैं कि अब लोग आपसी बातचीत के दौरान इन नामों का इस्तेमाल करते हैं.
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