रिक्शावाले के भेष में आए इस एक्टर को देख चायवाला बोला, बेचारे की क्या हालत हो गई

फ्रेंच-ब्रिटिश डायरेक्टर रोलैंड जॉफ की 1992 में रिलीज हुई फिल्म ‘सिटी ऑफ जॉय’ के लिए ओम पुरी को हॉलीवुड एक्टर पैट्रिक स्वैज़ के साथ लीड रोल में लिया गया था. तब इसमें उन्हें हसारी पाल नाम के ऐसे ग्रामीण का रोल करना था जो पत्नी और तीन बच्चों के साथ रोजगार तलाश करने कलकत्ता आता है और वहां आकर रिक्शा चलाने लगता है. ओम पुरी हर फिल्म में रोल की तैयारी शूटिंग से काफी पहले से ही करने लगते थे और इस फिल्म के लिए उन्होंने दो रिक्शा वालों से रिक्शा खींचना सीखा ज्यादातर रिक्शा वाले नंगे पैर ही दौड़ते थे. रोज सुबह ओम पुरी निकलते और रिक्शा चलाते.

फिल्म सिटी ऑफ जॉय में अपने किरदार में ओम पुरी.Third party image reference
लेकिन एक दिन सुबह-सुबह वे रिक्शा चलाने के बाद चाय पीने सड़क किनारे बनी टी-स्टॉल पर रुके. तब वहां दो बुजुर्ग लोग बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे और ओम पुरी को देख एक ने दूसरे से कहा, “अरे, ये रिक्शा वाला तुमको ओम पुरी जैसा नहीं दिखता है?” इस पर दूसरे वाले ने भी सहमति में सिर हिलाया. जब ओम ने अपनी चाय खत्म की तो उनसे कहा कि वे ही ओम पुरी हैं. उन्होंने ओम को देखा और उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा था. मगर बाद में जब ओम वहां से निकलने लगे तो उन्होंने चाय वाले को बोलते हुए सुना, “बेचारा. गरीब आदमी. बड़े दुख की बात है इसकी क्या हालत हो गई है, कितना अच्छा एक्टर हुआ करता था. देखो अब रिक्शा चला रहा है!”
जाते-जाते ओम ये सब सुन रहे थे और स्माइल कर रहे थे क्योंकि उनकी मेहनत रंग लाई और लोग उन्हें रिक्शा वाला मान रहे थे.
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