शास्त्रों में बताया गया है पीपल का महत्त्व, जानें शनिवार के दिन ही क्यों होती है पूजा

हमारे शास्त्रों में पीपल के पेड़ का बहुत महत्व है। आपने बहुत सारे लोगों को देखा होगा कि वो पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि पीपल के पेड़ की पूजा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होती है। वैसे लोग पीपल के पेड़ की पूजा रोज करते हैं लेकिन अगर आप इस काम को शनिवार को करें तो आपका इसका बेहतर फल मिलेगा । पूर्णिमा और अमावस्या के दिन भी पीपल के पेड़ की पूजा करने वालों की कमी नहीं है। लोगों में ऐसा विश्वास है कि पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितृगण प्रसन्न होते हैं और शनि दोष के कुप्रभाव से मुक्ति मिलती है। इसलिए शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

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शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का महत्व
बहुत कम लोगों को ये पता होगा कि शास्त्रों में पीपल के पेड़ को विशेष महत्व दिया गया है। पीपल के पेड़ को देव वृक्ष की संज्ञा दी गयी है। यही नहीं गीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने पीपल के वृक्ष को स्वयं अपना ही स्वरूप बताया है। श्री कृष्ण ने कहा है ‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणां’ अर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूं। शास्त्रों में विदित है कि ‘अश्वत्थ: पूजितोयत्र पूजिता:सर्व देवता:।’ अर्थात् पीपल की पूजा करने से एक साथ सभी देवताओं की पूजा का फल प्राप्त हो जाता है। इसलिए आप पीपल के पेड़ की पूजा करें।

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वहीं स्कन्दपुराण में भी पीपल का विशेष वर्णन है। इसमें कहा गया है कि पीपल के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत भगवान का वास होता है। वहीं व्रतराज नामक ग्रंथ में बताया गया है कि हर दिन पीपल पर जल चढ़ाकर तीन बार परिक्रमा करने से आर्थिक समस्या दूर हो जाती है।

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कहा जाता है कि जो महिला नियमित पीपल की पूजा करती हैं उनका सौभाग्य बढ़ता है। शनिवार के दिन अगर अमावस्या तिथि हो तब तो बात और भी विशेष होती है। इस दिन सरसो तेल का दीपक जलाकर काले तिल से पीपल के पेड़ की पूजा करने से आपके कष्ट दूर हो जाते हैं।
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