सौतेली मां और ननद बनकर घर में मचाती थी कलह, बीते दिनों की बैड वुमन आजकल यहां हैं

80 और 90 के दशक में ज्यादातर फिल्मों में घरों को बर्बाद करने का किरदार कई अभिनेत्रियों ने निभाया लेकिन जो आज भी लोगों को याद हैं। हम उन्हीं एक्ट्रेसेस में एक अभिनेत्री बिंदू की बात करने जा रहे हैं जो सौतेली मां और ननद बनकर घर में मचाती थी कलह, मगर असल जिंदगी में उनका नेचर बहुत ज्यादा अच्छा है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। चलिए बताते हैं इनके बारे में कुछ अनसुनी बातें।

सौतेली मां और ननद बनकर घर में मचाती थी कलह


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बॉलीवुड में जितनी एहमियत हीरो को दी जाती है उतनी खलनायक या खलनायिका की भी होती है। फिल्मों में जब हीरो को हीरोइन से प्यार होता है तब उनकी जिंदगी खराब करने के लिए विलेन की एंट्री होती है। 80 और 90 के दशक में ये काम सास, ननद या देवरानी-जेठानी करती थी। हिंदी सिनेमा में ऐसी ही एक वैंप खलनायिका बिंदू भी थीं जिन्होंने कई यादगार किरदार निभाए। अपने किरदार से फैंस का दिल जीतने वाली ‘मोना डार्लिंग’ ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1962 में आई फिल्म अनपढ़ से की थी।

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उस समय वे 11 साल की थीं लेकिन शादी के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सारी फिल्में की और नाम कमाया। बिंदू को इस कदर प्रसिद्धि हासिल हुई कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी विलेन समझने लगे थे। बीबीसी को दिए अपने एक इंटरव्यू में बिंदु ने बताया था कि उन्हें रोल ही वैंप के मिले वरना वे अच्छे किरदार करना चाहती थीं। बिंदु ने इस बारे में कहा, ‘जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की तो वो दौर खलनायिका का था। मैं हीरोइन बनना चाहती थी लेकिन किसी ने कहा कि मैं बहुत पतली हूं, हिंदी भी ठीक से नहीं बोल सकती। बहुत लंबी हूं फिर मेरी कमिया लोगों को पसंद आने लगी। मैंने शुरुआती फिल्म दो रास्ते में विलेन का किरदार निभाया।’ साल 1970 मे आई फिल्म कटी पतंग के गाने मेरा नाम शबनम से ये उस दौर की आइटम क्वीन बन गई थीं।

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पहले के समय की फिल्मों में वैंप को बोल्ड बनाया जाता था जबकि हीरोइन इतनी बोल्ड नहीं दिखाई जाती थीं। मगर 80 और 90 के दशक में हीरोइनों को भी बोल्ड बनाया गया जितना कि वैंप होती थी। बिंदु ने अपने दमदार अभिनय के दम पर खलनायिका के तौर पर जमा लिया और उस जमाने में बिंदु की लोगों में अपनी पहचान एक अलग ही तरह से होने लगी थी। फिल्मफेयर मैग्जीन को दिए अपने एक इंटरव्यू में बिंदु ने बताया था कि एक बार जब वो अपनी बहन के बच्चों के साथ फिल्म देखने गईं तब फिल्म के बाद बच्चों ने कहा- बिंदु आंटी आप तो हमारे साथ ऐसा नही करती, पर फिल्म में क्यों करती हो? इतना ही नहीं बिंदु ये भी बताने लगीं कि अपने किरदार की वजह से उन्हें गालियां भी खानी पड़ती थी। इंटरव्यू के दौरान बिंदु ने कहा, ‘गालियों को खुद का अवॉर्ड समझने लगीं। जब मुझे गालियां पड़ती थीं तो मुझे लगता था कि मैं काम अच्छे से कर रही हूं।’ बिंदु ने अपने करियर में ऐसे किरदार निभाए जिससे कई घरों में कलह भी होते थे। आपको बता दें कि बिंदु ने बॉलीवुड में कटी पतंग, बनारसी बाबू, हवस, जंजीर, दो रास्ते, अभिमान, बीवी हो तो ऐसी, घर हो तो ऐसा, शोला और शबनम, आंसू बने अंगारे, अमर प्रेम, प्रेम रोग, हम आपके हैं कौन, मैं हूं ना, दुश्मन, प्यार झुकता नहीं, आंखें और ओम शांति ओम जैसी कई फिल्मों में सफलतापूर्वक काम किया। अब बिंदू फिल्मों में काम नहीं करती हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताती हैं।
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