'मैंने कांपते हाथों से किया था स्मिता पाटिल के शव का श्रृंगार' मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत


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स्मिता पाटिल को गुजरे हुए 33 साल हो गए हैं। 13 दिसंबर 1986 को चाइल्ड बर्थ कॉम्प्लिकेशन के चलते 31 साल की उम्र में उनका निधन हो गया गया। जब स्मिता की अंतिम विदाई हुई तो उन्हें दुल्हन की तरह सजाया गया था और उनका मेकअप बॉलीवुड के पॉपुलर मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने उनकी अंतिम इच्छा के तहत किया था। दीपक स्मिता को अपनी बहन मानते थे। उनकी पुण्यतिथि पर दीपक ने बताया कि उन्होंने कांपते हाथों से स्मिता के शव का श्रृंगार किया था। 

दीपक सावंत की जुबानी, स्मिता की कहानी

  1. मैं स्मिता जी के काफी करीब था, वह मुझे भाई मानती थीं। लेकिन मेरी जिंदगी का सबसे इमोशनल मोमेंट मेरी इसी बहन से जुड़ा हुआ है। स्मिता जी ने कई बार मेरे सामने ही अपनी मां से यह बोला था कि जब मैं मरूंगी तब मुझे सुहागन बनाकर भेजना। इतना सुनते ही मैं उन्हें डांट देता था कि कैसी बातें करती हो। आगे से ऐसा मत बोलना। जब उनका जब देहांत हुआ, तब इस अभागे भाई को अपने इन्हीं हाथों से उनकी उस इच्छा को पूरा करना पड़ा।

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उन्हें जो मेकअप किट मैंने दिया था, वही लेकर उनकी मम्मी मेरे पास आईं और बोलीं कि तुमने उसको यह किट दी थी न, इसे वह बहुत पसंद करती थी। अब तुम उसकी इच्छा पूरी करो। इसी किट से उसका सुहागन जैसा मेकअप करो और अपनी बहन को विदा करो। इतना सुनते ही मैं फूट-फूटकर रोने लगा। कांपते हाथों से अपनी बहन की मृत देह का श्रंृगार किया। यह सब कैसे कर पाया मुझे मालूम भी नहीं है।
  1. उस समय दूरदर्शन ने इसे कवर भी किया था। मैंने इससे पहले कभी डेड बॉडी का मेकअप नहीं किया था। किसी ने किया हो ऐसा सुना भी नहीं था। पर उनकी आखिरी इच्छा जो पूरी करनी थी।

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इस मेकअप किट का भी एक किस्सा है। स्मिता जी ज्यादातर आर्ट फिल्म करती थीं और उन दिनों आर्ट फिल्म वालों के पास ज्यादा खर्च के लिए पैसे ही नहीं होते थे। मैं जब उनसे जुड़ा, तब उन्होंने बोला कि- मेरी ताकत नहीं है कि आपको पेमेंट कर सकूं। मुझे एक किट बनाकर दे दीजिए मैं खुद मेकअप कर लूंगी। तभी मैंने उन्हें यह किट दी थी, जिसे वह हमेशा साथ रखती थीं। जबसे मैं उनका मेकअप करने लगा, उसके बाद उन्हें कई कमर्शियल फिल्में मिलने लगीं। इससे गुस्साए आर्ट फिल्ममेकर मुझे गालियां बकते, पर चूंकि स्मिता जी खुश थी तो मुझे भी खुशी हो रही थी।

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हमारे बीच भाई-बहन का रिश्ता कैसे बना, इसकी भी एक कहानी है। वे अकेली शूटिंग पर जाती थीं तो मुझे चिंता होती थी। एक बार वह जंगल की तरफ जा रही थीं। मुझे फिक्र हुई तो उनके पीछे-पीछे चला गया। उनके वापस आपने पर मैंने उनको डांटकर कहा, कि आप अकेली लड़की ऐसा क्यों करती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम था, कि मेरा भाई मुझे देख रहा है, इसलिए बिंदास चली गई। भाई के रहते डर किस बात का? उस दिन उन्होंने मुझे भाई कहा तो तबसे हमारा भाई-बहन का रिलेशन बन गया।

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हम दोनों भाई-बहन के बीच झगड़ा भी होता था। उनकी फिल्म 'वारिस' की शूटिंग पंजाब में हो रही थी। उसमें उनका विधवा का रोल था, तो इस वजह से मैंने उनका डल मेकअप किया था। इस मेकअप पर उनको किसी ने चिढ़ा दिया, तब उन्होंने मेरे साथ झगड़ा किया। मुझे भी गुस्सा आ गया और मैं मुंबई वापस आ गया।

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मुंबई आने पर मुझे अहसास हुआ कि मैं अपनी सिस्टर को अकेले छोड़कर आ गया हूं। फिर रातों-रात रिटर्न फ्लाइट लेकर दिल्ली गया और वहां से टैक्सी पकड़कर करनाल पहुंचा। वहां पर राज बब्बर भी पहुंच चुके थे। शायद उन्होंने स्मिता को समझाया होगा। वह मेरे पास आई और बोलीं-दीपक जी, आई एम सॉरी। बाद में पता चला कि वह किसी और से नाराज थीं और गुस्सा मुझपर उतार दिया था।
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