वो डायरेक्टर, 26 साल में जिसकी एक भी फिल्म नहीं पिटी!

बतौर डायरेक्टर शंकर की पहली फिल्म 'जेंटलमैन' 26 साल पहले 30 जुलाई 1993 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म अर्जुन और मधु ने लीड रोल किए थे. फिल्म ने लागत से तीन गुना पैसे कमाए.

फिल्म हिंदुस्तानी (1996) की शूटिंग के दौरान कमल हसन और निर्देशक शंकर.Third party image reference
#Nostalgia = शंकर
मुक्काला मुकाबला, होगा.. गाना आपको याद है. ये गाना शंकर की फिल्म का ही था. वह, जिसमें माइकल जैक्सन जैसा डांसर (प्रभुदेवा) होता है. दो काउबॉय शूट करते हैं और उसका सिर, कलाइयां, टखने अदृश्य हो जाते हैं. लेकिन वह फिर भी नाचता रहता है.
रूप सुहाना लगता है, चांद पुराना लगता है, तेरे आगे ओ बालम. ये गाना उनकी पहली फिल्म जेंटलमैन में था. आज भी याद है! एक यंग लड़के ने इसमें म्यूजिक दिया था और नाम था ए. आर. रहमान. इसके बाद करीब सभी फिल्मों में दोनों ने साथ काम किया.
टेलीफोन धुन में हंसने वाली को भूले/भूली हैं? जो फिल्म हिंदुस्तानी कमल हसन और मनीषा कोइराला पर फिल्माए गया था.
उर्वशी उर्वशी टेक इट इज़ी उर्वशी और पट्‌टी रैप. ये दो पागलपन भरे गाने. कैसे भूलेंगे आप? इनमें प्रभुदेवा और वदीवेलू की चपलता और शरारती बच्चों जैसे अद्भुत डांस को आज तक कोई मैच नहीं कर पाया है. विशुद्ध जादू था.

उर्वशी.. गीत में वदीवेलू.Third party image reference
ऐश्वर्या राय स्टारर फिल्म जींस के एक गाने में शंकर ने दुनिया के सात अजूबे दिखाए. सिर्फ एक गाने के लिए उन्होने इतना रूपया खर्चा किया. खास बात हमें वो गाना वैसे ही याद है जैसे सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न.
एस. शंकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके आए तो थे अति यथार्थवादी फिल्में बनाने के लिए. ऐसी फिल्में जिनमें न कोई सुपरस्टार हो, न 100 करोड़ का बजट, न टेक्नोलॉजी का बेजां इस्तेमाल, न पांच-पांच भव्य विराट गाने. उन्हें तो वैसी फिल्में बनानी थीं जैसी तमिल निर्देशक जे. महेंद्रन और अन्य बनाते थे. हल्की-फुल्की, रोमांटिक, भारी ड्रामा वाली, मामूली मसलों वाली फिल्म. जैसे 1978 में प्रदर्शित ‘मुल्लुम मलरुम’. इसमें रजनीकांत ने काली की केंद्रीय भूमिका निभाई थी.

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इसके एक साल बाद प्रदर्शित हुई महेंद्रन की यादगार ड्रामा ‘उदिरिपूक्कल’ भी शंकर को पसंद थी. वे 25 साल के थे तब तमिल फिल्मों में आए. उन्होने शुरुआत सबसे निचले स्तर से की और वो निर्देशक एस. ए. चंद्रशेखर के फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर बन गए. 1988 से लेकर अगले पांच साल तक शंकर ने उन्हें असिस्ट किया. 1990 में आई तमिल फिल्म ‘सीथा’ में तो उन्होंने छोटा कॉमेडी रोल भी किया. वे विलेन के लल्लू से साइडकिक बने थे. लेकिन इसी दौरान तीन हिंदी फिल्मों – ‘जय शिव शंकर’, ‘आज़ाद देश के ग़ुलाम’, ‘इंसाफ की देवी’ – में सहयोगी निर्देशक रहे. इन फिल्मों में जीतेंद्र, राजेश खन्ना, ऋषि कपूर, रेखा और डिंपल कपाड़िया जैसे एक्टर्स ने काम किया था.
वर्ष 1993 में बतौर निर्देशक उन्होने अपनी पहली फिल्म बनाने से पहले शंकर ने गंभीर विषय वाली एक महिला केंद्रित कहानी लिखी थी और पूरे कठोर सिनेमाई अंदाज में वे उसे कहना चाहते थे. वे कई निर्माताओं से मिले लेकिन कोई उनकी इस कहानी में पैसा लगाने को राज़ी न था. क्योकि साउथ का पूरा ज़ोर उस दौर में मार-धाड़ और ख़ून-ख़राबे पर था. इसी दौर में इंतजार करने और चलन को देखने के बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया और एक्शन फिल्म की ओर ही हो लिए.

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हालांकि उनकी नायकअपरिचित  और हिंदुस्तानी जैसी फिल्मों में समाज की भलाई का जुनून रखने वाले नायक अगर हैं और लोगों की समस्याएं दिखती हैं तो यथार्थपरकता के लिए उसी पुराने आंशिक से मोह के कारण.
एक बार शुरुआत करने के बाद शंकर लोकप्रियता और कमर्शियल मानकों में उत्तरोत्तर ऊंचे उठते गए हैं. आज उनका साउथ में वैसा ही कल्ट है जैसा रजनीकांत का है. करीब 24 साल हो रहे हैं उन्हें काम करते हुए और इन वर्षों में उन्होने कोई 13* फिल्मों का निर्देशन किया है. 9 का निर्माण किया है और उन तेरह में से दस फिल्में हिंदी में हमने देखी हैं. संबंधित समय के एक-एक बच्चे को याद होगी. क्योकि उनकी हर कहानी छोटे से आइडिया से आगे बढ़ती है और बहुत सारी मिलावट से प्रभावोत्पादकता पा लेती है. हम हिंदी में आई* उनकी दस फिल्मों पर नजर डाल सकते हैं.
1 - पहली, द जेंटलमैन (1993) इस फिल्म का नायक अर्जुन धनवानों के यहां चोरियां करता है ताकि गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा दिला सके.
2 - हमसे है मुकाबला (1994) ये फिल्म प्रभु नाम के युवक के बारे में है जिसे राज्यपाल की बेटी से प्यार हो जाता है लेकिन वो साधारण परिवार से है. उसे अपना प्यार भी जीतना है और अपने राज्य में होने जा रही बड़ी आतंकी वारदात को भी रोकना है.
3 - हिंदुस्तानी (1996) फिल्म में एक 70 साल के बुजुर्ग सेनापथी की कहानी है और वह बहुत ईमानदार है. जो अपने राज्य में रिश्वतख़ोरों को एक-एक करके मारना शुरू करता है, लाइव टीवी पर भी. वो आज़ाद हिंद फौज में रहा है और देश की आज़ादी के लिए लड़ा. उसकी बेटी अस्पताल में इसलिए मर गई क्योंकि उसने रिश्वत नहीं दी. लेकिन अब उसका बेटा भी थोड़ी बहुत रिश्वत लेता है और वो उसे भी मारेगा.
4 - जीन्स (1998) इस फिल्म में अमेरिका में बसा एक तमिल रेस्टोरेंट व्यापारी है जिसके दो जुड़वा बेटे हैं और वो मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. मगर वो दोनों एक जैसे दिखते हैं और वो एक ही लड़की मधुमिता के प्रति आकर्षित हो जाते हैं. लेकिन बाद में एक भाई रास्ते से हट जाता है. मगर पिता शादी से इनकार कर देता है क्योंकि पिता भी जुड़वा था और शादी के बाद उसका परिवार बिखरा था.
5 - नायक (2001) ये फिल्म एक ईमानदार पत्रकार शिवाजी राव की कहानी है जो राज्य के मुख्यमंत्री का इंटरव्यू लेता है. उनसे एक-के बाद एक सवाल कर उसके घोटाले उजागर कर देता है और फिर फंसा मुख्यमंत्री उसे चैलेंज करता है कि कहना बड़ा आसान है वो एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर देखे फिर पता चलेगा. फिर शिवाजी इस शर्त को मानकर एक दिन का सीएम बनता है.
6 - अपरिचित (2006) अंबी की कहानी है जो उपभोक्ता हितों का वकील है और वो बेहद आदर्शवादी है. वो चाहता है सब कानून का पालन करे लेकिन अपने आसपास भ्रष्टाचार को देख उसमें बहुत गुस्सा भर जाता है और उसे [एकाधिक व्यक्तित्व विकार ] हो जाता है. फिर वह भ्रष्टाचारियों की सूची बनाता है और उन्हें हिंदु धर्म की पुस्तक गरुड़ पुराण में वर्णित यंत्रणाएं देकर मारना शुरू करता है.
7 - सातवीं हिंदी प्रस्तुति सिवाजी (2007) इसी फिल्म नाम वाले नायक की कहानी है जो अमेरिका से अपने राज्य लौटा है. वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. यहां वो पढ़ाई व इलाज के लिए अस्पताल बनाना चाहता है लेकिन एक भ्रष्ट राजनेता ऐसा नहीं करने दे रहा. अब शिवाजी अपने तरीके से उसका सामना करता है.
8 - रोबोट (2010) इस फिल्म में एक वैज्ञानिक अपनी ही शक्ल वाला एंड्रॉयड रोबोट बनाता है लेकिन वो रोबोट इंसानों की तरह इमोशन और समझने की शक्ति विकसित कर लेता है और वह उस वैज्ञानिक की प्रेमिका के प्रेम में पड़ जाता है. बाद में वो इंसानों के विनाश पर उतर आता है.
9 - बीती रिलीज, आई (2015) इस फिल्म में एक बॉडीबिल्डर लिंगेसन की कहानी है जो टॉप मॉडल बनता है लेकिन फिर उसका शरीर विकृत होने लगता है और वो कुबड़ा हो जाता है. वो अपनी प्रेमिका और लोगों से दूर एकाकी जीवन जीने को मजबूर हो जाता है लेकिन जब उसे ज्ञात होता है कि दुश्मनों ने धोखे से इंजेक्शन लगाकर उसे ऐसा कर दिया है तो वो एक-एक करके सबको मारना शुरू करता है.
10 - दसवीं फिल्म (रोबोट) 2.0 (2018) यह फिल्म रोबोट के आगे की कहानी है. इसमें वैज्ञानिक और उसका रोबो है और इस बार उनका सामना दुष्ट डॉक्टर रिचर्ड से होगा.

आई के ऑडियो लॉन्च पर रजनीकांत और शंकर.Third party image reference
शंकर के निर्देशन में सिर्फ ‘बॉयज़’ ही ऐसी तमिल फिल्म रही है जो हिंदी में नहीं लगी. एक अन्य फिल्म ‘ननबन’ थी जो ‘3 ईडियट्स’ की तमिल रीमेक थी.
रिकॉर्ड रूप से उनकी कोई भी फिल्म फ्लॉप नहीं हुई है और किसी फिल्म ने वितरकों, निर्माताओं को घाटा नहीं दिया है. शंकर आज अपनी हर अगली फिल्म के साथ देश के (बॉलीवुड समेत) सबसे मोटी कमाई करने वाले निर्देशक के तौर चर्चा में आते जाते हैं और आज से दस बरस पहले वे एक फिल्म डायरेक्ट करने के इतने करोड़ लेते थे जितने तब शाहरुख-सलमान भी नहीं लेते थे. उन्होंने अपनी फिल्मों में टेक्नोलॉजी का निरंतर बढ़ता इस्तेमाल किया, उन्होंने कभी गानों की भव्यता में कमी नहीं आने दी. बैकग्राउंड डांसर सदा बढ़ते ही रहे. इंग्लिश भाषा, अमेरिका में पढ़ा नायक, अमेरिका में बसा नायक, अमेरिका से पढ़कर गांव की सेवा करने लौटा नायक, विदेशी चेहरों की गानों में मौजूदगी.. औरइसका चाव भी उनसे छूटा नहीं. दरअसल ये एक ट्रिक भी है.
शंकर शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन के साथ भी काम करना चाहते थे लेकिन बात नहीं बनी. उन्होने ‘रोबोट’ की कहानी शाहरुख को सुनाई लेकिन बात नहीं बनी. जैसे कि ‘रोबोट’ की सीक्वल ‘2.0’ के लिए आमिर से बात नहीं बनी क्योंकि शाहरुख, आमिर, शंकर खुद अपने आप में कमर्शियल सफलता के संस्थान है और ये सदा अपने सारे रचनात्मक कार्य के संपूर्ण अधिकार अपने पास रख पाने की स्थिति में ही समय और ऊर्जा लगाते हैं. फिल्म रोबोट में अमिताभ बच्चन को उन्होंने विलेन का रोल पेश किया था लेकिन बच्चन ने मना कर दिया क्योंकि उनकी पिछली ग्रे शेड्स वाली फिल्में नहीं चली थीं.
फिर शंकर ने ‘2.0’ में अक्षय कुमार को खतरनाक और बेहद बुरा लगने वाला विलेन बना दिया है और अक्षय की ये पहली तमिल फिल्म थी.

रोबोट-2 में अक्षय का लुक.Third party image reference
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