वो बॉलीवुड एक्टर, जो लगातार 25 फ्लॉप फ़िल्में देने के बावजूद सुपरस्टार बना

‘ये धरती मेरी मां है’ और ‘मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता और तुम मुझे भूल जाओ, ये मैं होने नहीं दूंगा’ जैसे डायलॉग सुनकर एक मज़बूत कद-काठी, भारी-भरकम आवाज़ और भोली-भाली सूरत जो नजरों के सामने तैर जाती है न, कोई नही ये हैं सुनील शेट्टी. वही सुनील शेट्टी जो ‘वक़्त हमारा है’ फिल्म में अपनी हीरोइन की कार ठीक करने के लिए हाथ से ही गाड़ी उठा देता है.

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वही सुनील शेट्टी जो ‘धड़कन’ फिल्म में अपना प्यार पाने के लिए सारी हदें तोड़ता हुआ फ़िल्मफेयर का बेस्ट विलेन का अवॉर्ड ले उड़ता है. कर्नाटक के मुल्की में 11 अगस्त 1961 को जन्मे सुनील शेट्टी को महज़ एक्टर कहना गलत ही होगा. क्योंकि वो सफल एक्टर होने के साथ ही एक सफल बिज़नेसमैन भी हैं. उनके बिज़नेस में होटल से लेकर बुटीक और फिल्म प्रोडक्शन तक शामिल है. बॉलीवुड में उनको सब ‘अन्ना’ बुलाते हैं.

फ़िल्म ‘वक़्त हमारा है’ के एक दृश्य में सुनील.Third party image reference
अमिताभ बच्चन की वजह से सब सुनील को अन्ना बुलाने लगे
अन्ना का मतलब होता हैं बड़ा भाई ये शब्द साउथ इंडिया में काफ़ी प्रचलित है और फिर सुनील भी साउथ से ही आते हैं. उन्हें शुरुआत से ही अन्ना नहीं बुलाया जाता था. उनका ये नाम संजय गुप्ता की फिल्म ‘कांटे’ की शूटिंग के सेट पर पड़ा. उस फिल्म में सुनील के साथ संजय मांजरेकर, संजय दत्त, लकी अली और अमिताभ बच्चन भी थे. संजय अपने ख़ुशमिजाजी के लिए मशहूर हैं, तो उनका रवैया सेट पर भी कुछ वैसा ही था. लेकिन सुनील उनसे उम्र में छोटे होने के बावजूद काफी संजीदा थे और संजय को उनकी हरकतों के लिए डांटते-समझाते रहते थे.

फ़िल्म ‘कांटे’ के एक दृश्य में सुनील शेट्टी.Third party image reference
इन सब से परेशान होकर संजय ने उन्हें ‘अन्ना’ बुलाना शुरू कर दिया और फिर संजय की देखा-देखी बच्चन साहब भी उन्हें उसी नाम से बुलाने लगे. बच्चन साहब के सुनील को अन्ना बुलाने के बाद सेट पर मौजूद सभी लोग ही उन्हें अन्ना बुलाने लगे. पहले तो सुनील को थोड़ा अटपटा लगता था लेकिन वक्त के साथ वो भी उससे यूज़ टू हो गए. अब तो सारी इंडस्ट्री और उनके फैंस भी उन्हें अन्ना ही बुलाते हैं.

फिल्म ‘कांटे’ की पूरी कास्ट.Third party image reference
पहली दो फिल्मों से निकाल दिए गए थे
प्रेजेंट सेंसर बोर्ड चेयरमैन पहलाज निहलानी 90s के मशहूर निर्देशक थे और उन्होंने 1992 में सुनील को लेकर ‘फ़ौलाद’ नाम की एक फिल्म शुरू की. लेकिन किसी कारण वंश वो फिल्म बन नहीं सकी. इसके बाद अगला मौका सुनील को राजीव राय की अनाम फिल्म में मिला. लेकिन वो भी वर्कआउट नहीं हुआ. और ऐसा क्यों हुआ?
इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है. राजीव राॅय एक फिल्म शुरू कर रहे थे जिसके लिए उन्होंने एक हीरो को कास्ट कर लिया था. लेकिन उस फिल्म में सुनील नहीं थे और फिर शूटिंग शुरू होने से ऐन पहले वो एक्टर बीमार पड़ गया और राजीव ने सुनील को साइन कर लिया. इसकी खबर जैसे ही उस एक्टर को फिल्म में सुनील के कास्ट होने की मिली, तो वो फ़ौरन ठीक होकर सेट पर हाज़िर हो गया. तब सुनील को फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

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पहली फिल्म के रिलीज़ से पहले ही फिल्मों की लाइन लग गई थी
बलवान’ फिल्म को सुनील शेट्टी के करियर की पहली फिल्म होने का गौरव प्राप्त है. लेकिन सुनील की पहली साइन की हुई फिल्म ‘वक़्त हमारा है’ थी. इस फिल्म में सुनील के साथ अक्षय कुमार भी थे. सुनील ने इस फिल्म के बाद तक़रीबन 30 फ़िल्में साइन की जिसमें साजिद नाडियाडवाला की ‘बलवान’ भी थी और ये सुनील की सोलो हीरो फिल्म थी जो बनकर भी जल्दी तैयार हो गई थी. इसलिए इसे ‘वक़्त…’ से पहले रिलीज़ कर दिया गया.

अपनी पहली फ़िल्म ‘बलवान’ के एक दृश्य में सुनील शेट्टी.Third party image reference
फिल्म ‘बलवान’ बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और फिर तब सुनील को बॉलीवुड के नए एक्शन हीरो के रूप में देखा जाने लगा और उनके सामने फिल्मों की कतार लग गई. लेकिन कुछ डायरेक्टर्स ऐसे भी थे जिन्होंने सुनील को फिल्म देने से यह कहकर मना कर दिया कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती उन्हें वापस बिज़नेस में ही चले जाना चाहिए. लेकिन सुनील ने हार नहीं मानी और एक्टिंग करते रहे.

फ़िल्म ‘सपूत’ के एक सीन में सुनील शेट्टी और सोनाली बेंद्रे.Third party image reference
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